महिला के साथ यौन हिंसा की कोशिश हुई, लेकिन अदालत में दुष्कर्म की कोशिश का आरोप साबित नहीं हुआ—आखिर कानून की कसौटी क्या है? पटना हाईकोर्ट के दो अलग-अलग मामलों में दुष्कर्म की कोशिश से जुड़ी दोषसिद्धि हटाए जाने के बाद न्यायिक फैसलों की भाषा, सबूतों के मूल्यांकन और पीड़िता की गरिमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस विशेष रिपोर्ट में मन्विका मिश्रा के साथ समझिए हिमांशु कुमार पाठक और मोहम्मद ऐनुल हक से जुड़े मामलों में अदालतों ने क्या फैसला दिया, किन अपराधों में दोषसिद्धि बरकरार रही और सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य मामले ने इस बहस को किस तरह अहम बनाया।
